भक्तों के चमत्कारिक अनुभव

सोनी एदासानी, यू.ए.ई.

मेरा नाम सोनी एदासानी है तथा 29 दिसम्बर, 2007 को मेरे दूसरे बेटे "मीथ एदासानी" का जन्म हुआ था। सब कुछ मीथ के जन्म के दूसरे दिन तक ठीक चल रहा था, जब यूएई में डाक्टरों ने मुझे यह बताया कि उनको उसके ह्दय में घरघराहट सुनाई दे रही है और उसकी सांस ठीक नहीं चल रही है। क्योंकि उसकी आयु केवल 2 दिन की ही थी, डाक्टरों ने हमसे उसकी पूर्ण जांच करवाने के लिए उसके 3 महीने का हो जाने पर आने के लिए कहा।

40 दिन के बाद, जब मैं मीथ को लेकर भारत विस्तृत जांच पड़ताल के लिए आई तो यह निदान किया गया कि उसके ह्दय में 2. 5 मि.मी. का छेद है तथा चिकित्सीय रूप से इस रोग को एट्रियल सेप्टल दोष कहा जाता है। इस स्थिति में, ह्दय में छेद होने से आक्सीजन का स्तर निम्न हो जाता है तथा शरीर में अशुद्ध रक्त का प्रवाह बहुत अधिक हो जाता है, जिसके कारण रोगी के थकान का स्तर बढ़ जाता है तथा इससे जुड़े अन्य रोग भी हो जाते हैं। इसके उपचार का एकमात्र तरीका ह्दय की सर्जरी कराना था जिससे इस छेद को बन्द किया जा सके तथा ह्दय अपना कामकाज सामान्य रूप से कर सके और यह सर्जरी बच्चे के 2 वर्ष का होने पर की जाती है।

मुझे यह भली भांति मालूम था कि मुझे अब आगे अपने बच्चे को कहां लेकर जाना है। बिना किसी और देरी के मैं और मेरी माताजी उसे आश्रम लेकर गए तथा स्वामी जी से प्रार्थना की तथा उन्हें पूरी समस्या बताई। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वे उसके लिए प्रार्थना करेंगे।

कुछ महीनों के उपरांत जांच फिर से की जानी थी ताकि रोगोपचार के संबंध में प्रगति को देखा जा सके। मैं बहुत निराश मन से वापस लखनऊ गई तथा उसकी जांच करवाने के लिए उसे उस पैथोलोजी तथा डाक्टर के पास ले कर गई जहां पर उसकी बेहोशी की स्थिति बिलकुल अंधेरे कमरे में उसकी जांच की जानी थी। मुझे बहुत डर लग रहा था, क्योंकि 10 महीने की आयु के बच्चे के साथ यह सब कुछ हो रहा था, लेकिन मेरे मन में कोई ऐसी भावना थी कि सभी कुछ ठीक हो जाएगा, क्योंकि विश्वास कभी असफल नहीं होता है।

डाक्टर ने जांच करने में 45 मिनट का समय लिया जबकि मैं चिंतित रूप से बाहर प्रतीक्षा कर रही थी डाक्टर क्या कहता है, मुझे इस बात को लेकर चिंता हो रही थी कि डाक्टर को इतना अधिक समय क्यों लग रहा है, तथा वह बात क्यों नहीं कर रहा है। आखिरकार काफी देर के बाद, मुझे यह पता चला की परिणाम क्या है, तथा वह मेरी सोच से बहुत ही परे था। मैं सोच रही थी की छेद सिकुड़ गया होगा... आदि

मैं यहां वह उल्लेख करना चाहती हूं जो डाक्टर ने कहा, " वास्तव में भगवान की आप पर बहुत कृपा है, मुझे स्वयं अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा है... ह्दय में कोई छेद नहीं है......, यह अपने आप ही बन्द हो गया है और इसलिए मुझे जांच करने में इतनी अधिक देर लग रही थी कि यह छेद दिखाई क्यों नहीं दे रहा है......

मैं डार्क रूप में बाहर आई तथा मेरी आंखों में खुशी के आंसू बह रहे थे तथा मैं मन ही मन गुरूजी का धन्यवाद कर रही थी, जिन्होंने यह चमत्कार कर दिखाया था। हमने यह जानकारी अपने पूरे परिवार को दी और हर कोई बहुत ही प्रसन्न था। हमारा परिवार इस सब कार्य के लिए गुरूजी का अहसान कभी नहीं भुला सकेंगे, लेकिन इस प्रकार के अनेक चमत्कार गुरूजी ने कर दिखाए हैं, लेकिन जिस कारण से यह बात मैं आपके साथ साझा करना चाहती हूं कि वह यह है कि जो कुछ विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र नहीं कर सकता है, उसे आध्यात्मिक शक्ति के बल पर किया जा सकता है।

हम सभी भाग्यवान हैं कि हमारे साथ हमारे ऐसे महान गुरूओं का सानिध्य है, जो हर रोज, हर क्षण हमारे लिए इतना कुछ करते रहते हैं तथा प्रतिदिन हमारा मार्ग दर्शन करते हैं, चाहे फिर हमारे जीवन की स्थितियां और चुनौतियां कुछ भी क्यों न हों।

जय गुरूदेव!!!!!!!!!!



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