भक्तों के चमत्कारिक अनुभव

मोनेश एदासानी, दुबई, यूएई

अपने प्रिय गुरूदेव के बारे में अपने व्यक्तिगत अनुभवों को लिखते हुए मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है।

हालांकि उनके जैसे महान व्यक्तित्व के बारे में लिखने का सामर्थ्य मुझ में नहीं है, लेकिन केवल एक सरल बात को लेकर मैं अपनी भावनाओं को व्यक्त करना चाहूंगा कि जो कुछ भी जीवन में आज है, वह केवल उनकी वजह से है तथा केवल गुरू महाराज जी की वहह से ही है तथा जो कुछ भी भविष्य में होगा, वैसा केवल और केवल उनके कारण होगा।

इस सभी की शुरूआत 1999 में हुई जब मैं यू.ए.ई. में आया था तथा आबू धाबी हवाई अड्डे पर उतरा था। हालांकि मैं आबू धाबी जाने के लिए इतना उत्सुक नहीं था, लेकिन मैंने इस प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मैंने अभी हाल ही में अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी तथा मेरे पास विकल्प चुनने की योग्यता नहीं थी। आपको सच्चाई बताऊं तो मैं हमेशा से ही जीवन के मूल्यों के प्रति नास्तिकता की ही सोच रखता था, मेरी बहन मुझे दुबई से यह बताया करती थी कि वे गुरू महाराज जी के सत्संग को एक सप्ताह में एक बार सुनते हैं। मैंने गुरू महाराज जी की तस्वीर भी नहीं देखी थी तथा उन्हें जानता भी नहीं था। मेरा धार्मिक बनने की तथा सत्संग सुनने की कोई इतनी इच्छा भी नहीं थी।

2 वर्ष के बाद, मैं दुबई में बहुत बुरी तरह से किसी नई नौकरी की खोज कर रहा था। मैंने हर जगह आवेदन किया, तथा लगभग छह महीने तक मुझे कोई उचित नौकरी नहीं मिली। यह मानना बहुत ही कठिन था कि इतना प्रयास करने के बावजूद मुझे किसी ने इंटरव्यू तक के लिए नहीं बुलाया। मैं बहुत ही दयनीय स्थिति में था तथा जीवन के प्रति आशा को छोड़ चुका था।

उस अकेलेपन तथा निराशा के दौर में, मेरा झुकाव गुरू महाराज जी की ओर होना शुरू हुआ। ऐसा हुआ कि मेरी रूचि गुरूजी के सत्संग की ओर बढ़ने लगी। मेरा मानना है कि यह मेरे गुरू महाराज जी की इच्छा थी कि मेरे मन में ऐसी भावना पैदा हुई।

मुझे दुबई से सत्संग की कैसेट मिलने लगी तथा मैं हर सुबह गुरू महाराज जी के सत्संग को सुना करता था और काम पर जाने से पहले गुरू चालीसा पढ़ता था।

इसके बाद मुझे महसूस हुआ कि मुझे कम से कम एक सत्संग में तो जरूर जाना चाहिए क्योंकि मैं आबु धाबी में था, इसलिए मैं सत्संग के समय पर उपस्थित नहीं हो सकता था। लेकिन सौभाग्य वश एक सार्वजनिक अवकाश का दिन था, तथा सत्संग के समय मैं दुबई में ही था, और इसके बाद मैंने गुरू महाराज से प्रार्थना करनी शुरू की मुझे सत्संग सुनने का अवसर दें।

और गुरू महाराज ने मेरी इस प्रार्थना को सुन लिया!!!!

मुझे दुबई में एक बार गोविन्द अंकल से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ तथा उस दिन से मेरा जीवन परिवर्तित हो गया। कुछ महीनों बाद मुझे शारजाह में नौकरी मिली, और यह बात गोविन्द अंकल मुझे पहले से ही बता चुके थे। लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि मेरी नौकरी बिलकुल वैसी ही थी जैसा मैं चाहता था। मुझे महसूस हुआ कि यह नौकरी केवल मेरे लिए खास तौर पर तैयार की गई है और यह मेरी अपेक्षाओं के अनुरूप भी है। मुझे आबू धाबी में बहुत ही कम समय में अपना ड्राईविंग लाईसेंस प्राप्त हुआ तथा इस पर बहुत ही कम पैसा खर्च हुआ। अचानक ही कुछ महीनों में मैंने यह अनुभव किया कि जीवन मेरे लिए कितना अच्छा है.

यह मेरे जीवन की सच्चाईयां थीं और यह केवल गुरू महाराज जी का ही चमत्कार था।

मेरे जीवन में ऐसे अनेक अवसर हैं जहां मेरे गुरू महाराज जी ने मेरी सहायता की और कठिन स्थितियों से मुझे निकाला। मुझे उस समय कुछ अहसास नहीं हुआ और जब मैं इस बात पर विचार करता हूं कि इन सभी कठिनाईयों से किस प्रकार से गुरू महाराज जी ने मेरी सहायता की।

उनकी मौजूदगी के बिना, मैं जीवन में भटक गया होता और यह सच्चाई भी है।

मैं महसूस करता हूं कि खाड़ी के देश में आने का एकमात्र उद्देश्य गुरू महाराज जी से मिलना था। यह बस इतना ही है कि आप दुनिया में कहीं भी क्यों न हों, एक दिन गुरू महाराज जी आपसे से जरूर मिलेंगे।



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