भक्तों के चमत्कारिक अनुभव

जय गुरूदेव शरणम्

इस अवसर पर मैं अपने आदरीय गुरूजी के चरण कमलों में अपनी भावनाओं तथा अनुभवों को अभिव्यक्त करना चाहता हूं।

1973 में, जब मैं केवल 13 वर्ष का था, तो मेरी मुलाकात डिफेंस कालोनी में गुरूजी से उस समय हुई थी, जब वह हमारे पारिवारिक मित्र महेन्द्र सिंह चौधरी से मिलने जा रहे थे तथा मुझे उस समय के प्रत्येक क्षण की याद है, ऐसा जैसे कि यह कल की ही बात हो। समय बीतता चला गया और मुझे नहीं मालूम की क्या ये क्षण मेरी जिंदगी में कभी लौट कर वापस आएंगे या नहीं? मैं अपने मित्र का आभारी तथा ऋणी हूं जिन्होने मेरा परिचय गुरूजी से कराया, क्योंकि मैं नहीं जानता की हमारे जीवन में गुरूजी के बिना हमने क्या किया होता या हमारे साथ क्या हुआ होता।

मेरी उम्र उस समय बहुत छोटी थी कि मैं यह समझ पाता कि किसी व्यक्ति के जीवन में गुरू की क्या आशय होता है, तथा मैं जीवन को ऐसे ही बिता रहा था। मेरे भाई गोविन्द भाई, ने किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में शीघ्रतापूर्वक इस बात के महत्व को समझ लिया तथा वे समय समय पर हमारा मार्ग दर्शन करते रहते हैं, तथा हमें अपने जीवन में गुरू के महत्व को समझाते रहते हैं तथा इसी कारण से हमारा मन भी काफी हद तक सही दिशा की ओर चलने लगा।

गुरूजी ने हमेशा हमसे अपने बच्चों की तरह की व्यवहार किया, तथा हमें काफी समय देते थे तथा हमारा ध्यान भी रखते थे, तथा उन दिनों हमारे बीच रिश्ता पिता और पुत्र जैसा ही था, न कि गुरू और भक्त का और जैसे जैसे समय बीतता चला गया, हमने उनकी बातों को समझना शुरू किया लेकिन सुनिश्चित रूप से गलतियां भी करते रहे तथा उन्होंने हमेशा हमारी गलतियों को सुधारा और हमारे जीवन में हमारा साथ देते रहे और मेरे पास उनके समय, सहायता, शिक्षाओं, प्यार, दुलार तथा ध्यान उनका आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं, क्योंकि मानवीय रूप से यह किसी के लिए भी असंभव ही है कि इतने सारे भक्तों के साथ व्यक्तिगत रूप से एक-एक कर उनके साथ व्यवहार किया जाए, उनका मार्ग दर्शन किया जाए तथा उन्हें सलाह आदि दी जाए और वह भी बिना किसी लालच के। हमारे गुरूजी ने ऐसा कर दिखाया, और शायद यही गुरू का एक गुण होता होगा।

हमारे गुरू पूर्ण गुरू थे तथा व्यावहारिक रूप से इस धरा पर उनके जैसे किसी व्यक्ति को खोज पाना असंभव ही है तथा मुझे पूरा विश्वास है कि अनेक भक्तों जिन्होने उन्हे समझा है या उन्हें थोड़ा भी जानते हैं, वे इस बात से सहमत होंगे।

यदि मुझे किसी के साथ अपने अनुभवों को साझा करना हो, तो घटनाओं को बताने में सदियों का समय लग जाएगा क्योंकि मैंने हर रोज, हर क्षण अपने जीवन में इतने चमत्कारों को देखा है कि मुझे यह अहसास नहीं होता कि कहां से शुरू किया जाए और कहां अंत किया जाए। जब हमारे ऊपर किसी भी गुरू का आशीर्वाद होता है, तो चमत्कार तो हर क्षण ही होते हैं; यह भक्त पर निर्भर करता है कि वह उन्हे किस रूप में देखता है।

पिछले 35 वर्षों में, मैंने उनके साथ या उनके आसपास 50% समय व्यतीत किया है क्योंकि मैं भारत में नहीं रहता हूं, लेकिन मैंने हर क्षण उनकी दयादृष्टि, आशीर्वाद, उपस्थिति को अपने जीवन में अनुभव किया है। किसी भी दूसरे व्यक्ति की तरह, मैंने भी अपने जीवन में परेशानियां झेली हैं लेकिन किसी भी कठिन स्थिति में उन्होने मेरी सहायता की है। 1983 में, लगभग 3 अवसरों पर मेरे ऊपर लूटेरों ने अफ्रीका में हमला किया था, और पहली बार तो मुझ पर गोली चलाई गई थी, लेकिन भाग्यवश मैं बच गया क्योंकि गुरूजी ने मेरी हर समय रक्षा की थी। यह कोई संयोग नहीं हो सकता कि मैं तीनों बार बिना किसी चोट के बच गया, और सुनिश्चित रूप से तथा शुद्ध रूप से यह उनका आशीर्वाद और दया थी, कि मैं आज भी जीवित हूं।

जैसाकि गुरूजी कहा करते थे कि, जो कुछ भी आपके लिए जरूरी है वह मिलेगा लेकिन आपकी कामनाओं के अनुसार प्राप्ति नहीं होगा। मैंने अपने जीवन में अनुभव किया है, जो कुछ हमारे लिए आवश्यक है, उन्होने वह किसी न किसी रूप में उपलब्ध कराया है, चाहे हम कहीं भी क्यों न हों।

मैं हमेशा यह प्रार्थना करता हूं कि उनके आशीर्वाद की वर्षा मुझ पर तथा मेरे परिवार पर होती रहे तथा हम निरन्तर सेवा करते रहे और उनके दिखाए मार्ग पर चलते रहें।



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