भक्तों के चमत्कारिक अनुभव

वनीषा महतानी, हांगकांग

हमारे पूजनीय गुरूओं, अर्थात आदरणीय स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज तथा आदरणीय स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य जी महाराज, द्वारा अपनी अमरत्वपूर्ण उपस्थिति से, अपना पूर्ण प्यार बरसाते आ रहे हैं और उन्होने हमारे जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है। आध्यात्मकि रूप से तथा भौतिकतावादी दृष्टिकोण से उनकी उपस्थिति से असंख्य चमत्कार घटित हुए हैं; इस प्रकार उन्होंने हमारे जीवन को परिवर्तित किया है, जिसमें उद्देश्यपूर्ण जीवन, उसका अर्थ तथा गहन प्राप्ति शामिल है।

गुरूजी के साथ हमारी पहली मुलाकात 1993 में हुई, और तब से लेकर हमारा पूरा परिवार आश्रम में आता रहता है, तथा इसी के परिणामस्वरूप हमें तथा हमारे बच्चों में जागरूकता पैदा हुई है और जीवन के प्रति हमारे दृष्टिकोण में परिवर्तन हुआ है तथा हमारी सोच सकारात्मक हुई है तथा हम अपने आस पास के दबाव को झेलने में सक्षम हुए हैं। हमारे बच्चों के प्रति गुरूजी के गहन स्नेह से उन्हें अच्छे मानवीय, सामाजिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों को आत्मसात करने की शिक्षा मिली है।

गुरूजी हमें, जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए विभिन्न साधन उपलब्ध कराते हैं फिर चाहे कैसी भी स्थिति क्यों न हो- तथा वे हमें हमारी व्यक्तिगत चुनौतियों के लक्ष्य को समझने में भी सहायता करते हैं जिससे हमारा आध्यात्मिक उन्नति होती है। उन्होनें हमें, "अवास्तविक" से "वास्तविक" का ज्ञान करवाया है तथा आध्यात्मिक जगत के प्रति हमारे दृष्टिकोण और सोच में परिवर्तन किया है। गुरूजी की कृपा से, ये चुनौतियां आई, तो केवल इसलिए कि हम गुरूजी के ओर समीप जा सकें, तथा उनके कमल रूपी श्रीचरणों में स्वयं को समर्पित कर सकें। उनकी मौजूदगी का अहसास हमें हमेशा होता रहता है।

हमारे परिवारों द्वारा हमारा पालन-पोषण रीति रिवाजों के अनुसार ही किया है तथा पूजा पाठ और हवन आदि इसके अभिन्न अंग रहे हैं, तथापि, विगत पर विचार करते हुए, उन प्रार्थनाओं के बल पर ही भगवान ने हमें आशीर्वाद प्रदान करते हुए 1995 में "गुरूजी" से मिलवाया है,ताकि हम मोक्ष के मार्ग पर चल सकें।

आत्म अनुभूति या जागृति ही एक मात्र उद्देश्य है जो कि नाम में निहित है। यह हमारा सौभाग्य ही रहा कि हमारे परिवार के सदस्यों द्वारा गुरूजी से एक-एक करके 1999, 2006, तथा 2007 में नामदान लिया। आज हमारे परिवार द्वारा नाम की महत्ता और शक्ति को समझा है तथा इसके कारण ही हमारा जीवन में परिवर्तन हुए हैं।

गुरूजी का आश्रम, इस धरा पर स्वर्ग ही है। मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर, मुझे भगवान की अनुभूति होती है, और मेरी प्रार्थनाओं को सुना तथा उत्तर दिया जाता है।

कभी उथल-पुथल से भरा यह जीवन गहरी शक्ति तथा निर्डरता से परिपूर्ण हो चुका है।

हमारे गुरूजी के आशीर्वाद ने हमारे जीवन में इतना अधिक उत्थान किया है कि जिससे हम उस परमसत्ता का अनुभव कर सकते हैं, तथा आध्यात्मिक जीवन के सार का अनुभव कर सकते हैं। मुझे वह दिन आज भी याद है जब गुरूजी ने हमें पहली बार अपनी शरण में लिया था।

गुरूजी हमेशा इस बात पर बल दिया करते थे कि, सत्य की उत्पत्ति सत्संग से होती है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमें सीधे भगवान के दूत, अर्थात हमारे गुरूजी से ही इन हीरे-मोतियों से भी कीमती सत्संग सुनने का अनेक बार अवसर प्राप्त हुआ है, उनके बारम्बार आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

19 वर्षों से गुरूजी के अनुयायी होने के रूप में, हमारी पूरे महतानी परिवार के जीवन में पूर्णतया परिवर्तन आए हैं। हम गुरूजी के बिना कहां होते? जब हम सुबह अपनी दैनिक प्रार्थनाओं में धूपबत्ती, अगरबत्ती और दिए जो जलाते हैं, तो यह बात केवल हम उन्हीं से ही पूछ सकते हैं।



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